मध्यप्रदेश के प्रमुख समाधि एवं मकबरे

मध्यप्रदेश के प्रमुख समाधि एवं मकबरे

यहाँ पर मध्यप्रदेश के प्रमुख समाधि एवं मकबरे (monuments-of-Madhya-Pradesh) के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है। मध्यप्रदेश के प्रमुख समाधि एवं मकबरे पर आधारित कई परीक्षाओं में पूछें जा चुके प्रश्न दिए है।

Table of Contents

मध्यप्रदेश के प्रमुख समाधि एवं मकबरे

तानसेन की समाधि

संगीत सम्राट की समाधि उपनगर ग्वालियर के हजीरा क्षेत्र में स्थित है। यह मकबरा प्रसिद्ध संगीत सम्राट तानसेन का है। तानसेन अकबर के दरबार में नौं रत्नों में से एक थे। यहां तानसेन के साथ उनके गुरु मोहम्मद गौस का भी मकबरा है। 1586 में तानसेन की मृत्यु आगरा में हो गई। और संगीतकार तानसेन की इच्छा अनुसार मोहम्मद गौस के मकबरे के समीप तानसेन का मकबरा बनाया गया।

मोहम्मद गौस का मकबरा

मुस्लिम गुरू और हिंदू शिष्य के अनूठे प्रेम का प्रतीक हजीरा स्थित मोहम्मद गौस का मकबरा दुनिया का एकमात्र ऐसा ऐ,तिहासिक स्मारक है जहां देश- विदेश के गायक व संगीतकार मन्नत मांगने आते हैं। उनके शिष्य तानसेन का स्मारक भी यहीं बना है। यहां से हर साल तानसेन समारोह की शुरूआत होती है। देश- विदेश के पर्यटक भी यहां सालभर आते रहते हैं।

मोहम्मद गौस की मृत्यु आगरा में हुई थी, लेकिन उन्हें दफन ग्वालियर में किया था। गौस के मकबरे का निर्माण सम्राट अकबर ने सन् 1606 में कराया। यह स्मारक मुगल शैली का है। इसमें परशियन, इस्लामिक व भारतीय तीनों तरह का स्थापत्य देखने को मिलता है। स्मारक में बलुआ पत्थरों का प्रयोग किया गया है।

होशंगशाह का मकबरा

इस मकबरे का निर्माण पूर्णतः संगमरमर से किया गया है। इस मकबरे के संबंध में कहा जाता है कि इसका निर्माण मांडू के प्रथम स्वतंत्र सुल्तान होशंगशाह गौरी ने 1405 ईसवी में संपादित किया था। होशंगशाह महत्वाकांक्षी शासक था। यह मांडू के करीब धार से लगभग 35 कि. मी. की दूरी पर स्थित है। इसी मकबरे को देखकर शाहजहां ने ताजमहल की कल्पना को साकार किया। ये पर्सियन कला का एक बेजोड़ नमूना है।

तात्या टोपे की समाधि

तात्या टोपे का वास्तविक नाम रामचंद्र पांडुरंग टोपे था। महाराष्ट्र का येवला उनका पैतृक गांव था। उनके पिता पांडुरंग एक पढ़े लिखे शख़्स थे जिन्हें वेद और उपनिषद पूरी तरह याद थे। तात्या टोपे की समाधि मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले मे अग्रसेन चौक के पास स्थित है तात्या टोपे भारत के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के एक प्रमुख सेनानायक थे। 18 अप्रैल 1859 को तात्या टोपे को फांसी दी गयी थी। ये महारानी लक्ष्मीबाई के सहयोगी थे।

रानी दुर्गावती की समाधि

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में बरेला ग्राम में रानी दुर्गावती की समाधि स्थित है, जो मंडला रोड पर स्थित है, वही रानी की समाधि बनी है। रानी दुर्गावती के सम्मान में 1983 में जबलपुर विश्वविद्यालय का नाम बदलकर रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय कर दिया गया। भारत सरकार ने 24 जून 1988 रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर एक डाक टिकट जारी कर रानी दुर्गावती को याद किया।

लक्ष्मीबाई की समाधि

रानी लक्ष्मीबाई की समाधि ग्वालियर मे फूल बाग़ में स्थित है। रानी लक्ष्मीबाई जिन्हें झांसी की रानी के नाम से भी जाना जाता है, ने 1857 में भारतीय क्रांति में अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध किया था। रानी लक्ष्मीबाई की समाधि भारत की महान महिला योद्धा की स्मृति में बनाई गई है।

पेशवा बाजीराव की समाधि

महान पेशवा बाजीराव की समाधी रावेरखेड़ी (खरगोन) में स्थित है। उत्तर भारत के लिए एक अभियान के समय उनकी मृत्यु यहीं नर्मदा किनारे हो गई थी। रावेरखेड़ी के पास बकावां में नर्मदा के पत्थरों को तराश कर शिव-लिंग बनाए जाते हैं।

नवाब हसन सिद्दीकी का मकबरा

यह मकबरा मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित है नगर में भोपाल टाकीज के समीप सफेद संगमरमर से निर्मित यह सुन्दर मकबरा भोपाल राज्य की शासिका शाहजहां बेगम के दूसरे शौहर नवाब हसन सिद्दीकी है। सन् 1890 में इनका निधन हुआ। शाहजहां बेगम ने उनकी याद में यह मकबरा निर्मित कराया था।

महारानी सांख्यराजे सिंधिया की समाधि

इस छत्री का निर्माण ग्वालियर के माधौराव सिंधिया ने अपनी माता की स्मृति में कराया था। यहां सिंधिया वंश के दौरान ही सुंदर छतरियों का निर्माण किया गया। ये छतरियां अलंकृत संगमरमर की कारीगरी का उत्कृष्ट नमूना हैं। छतरी में प्रवेश करते ही महारानी सांख्यराजे सिंधिया की स्मृति में समाधि स्थल है।

रानी अवंती बाई की समाधि

डिन्डोरी जिले के शाहपुर कस्बे के नजदीक ग्राम बालपुर में वीरांगना रानी अवन्तीबाई ने लड़ते-लड़ते अपने सीने में खंजर उतारा था। इस स्थान को बलिदान स्थल के रूप में सुरक्षित किया गया है। रानी अवन्ती बाई के वीरगति को प्राप्त हो जाने के बाद उनके पार्थिव शरीर को रामगढ़ लाया गया। रामगढ़ में ही रानी अवन्ती बाई की समाधि बनाई गई। रानी अवन्ती बाई की याद में जबलपुर में पवित्र नर्मदा नदी पर बने बरगी डेम का नाम रानी अवन्ती बाई के नाम पर रखा गया।

बैजू बावरा की समाधि

बैजू बावरा भारत के ध्रुपदगायक थे। उनको बैजनाथ प्रसाद और बैजनाथ मिश्र के नाम से भी जाना जाता है। वे ग्वालियर के राजा मानसिंह के दरबार के गायक थे और अकबर के दरबार के महान गायक तानसेन के समकालीन थे। उनकी समाधि मध्य प्रदेश के जिला अशोकनगर के चंदेरी में है।

अब्दुल्ला शाह चंगेज का मकबरा

अब्दुल्लाह शाह चंगेज का मकबरा मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित है। धार के किले में स्थित है यह मकबरा दिल्ली सल्तनत समकालीन इमारत है यह स्थापत्य कला का एक बेजोड़ नमूना है।

पीर बुधन का मकबरा

मुस्लिम संत पीर बुधन का सांवरा (शिवपुरी) में मकबरा है। शिवपुरी के सांवरा क्षेत्र में यह मेला 250 सालों से लग रहा है। कई सौ वर्षों पुराना यह मेला अगस्त और सिंतबर में आयोजित किया जाता है।

कान्हा बाबा की समाधि

कान्हा बाबा का मेला प्रत्येक वर्ष सोडलपुर हरदा जिला मध्य प्रदेश मे लगता है। कान्हा बाबा होशंगाबाद- हरदा के प्रसिद्ध संत थे इनको चमत्कारिक संत माना जाता है। यही पर कान्हा बाबा की समाधि है।

मुमताज महल की कब्र

मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले में ही शाहजहां की बेगम मुमताज की असली कब्र है। बुरहानपुर में अपनी चौदहवीं संतान को जन्म देने के दौरान मुमताज की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उन्हें यहीं दफनाया गया। बाद में उनकी कब्र को आगरा ले जाया गया।

दौलतखाँ लोदी का मकबरा

दक्षिण भारत पर फतेह के अभियान में दौलत खाँ लोदी ने शाहजहाँ की सहायता की। जिससे खुश होकर शाहजहां ने उसे दक्षिण का सूबेदार बनाया। दौलत खाँ की मौत के बाद उसकी याद में एक मकबरे का निर्माण करवाया गया था। इसके अंदर आठ मजारे है। यह मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले में स्थित है बुरहानपुर के किले के पास लोदी वंश के स्थापत्य कला का नमूना है।

झलकारी बाई की समाधि

झलकारी बाई की समाधि मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में स्थित है ये रानी लक्ष्मी बाई की सहायिका थी झलकारी बाई झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की नियमित महिला शाखा दुर्गा दल की सेनापति थीं। झलकारी बाई ने झाँसी के युद्ध में भारतीय बगावत के समय महत्वपूर्ण योगदान दिया था। वास्तव में, वह इतनी साहसी थी कि झांसी के किले की लड़ाई के दौरान, उसने खुद को रानी लक्ष्मीबाई के रूप में छिपा लिया और सेना को आदेश दिया। इस कारण असली रानी को इस दौरान भागने का मौका प्रदान किया था।

गिरधारी बाई की समाधि

गिरधारी बाई की समाधि मध्यप्रदेश के मण्डला जिले में स्थित है। गिरधारी बाई मण्डला की शासिका रानी अवन्तिबाई की सहायिका थी।

मल्हार राव होलकर की छतरी

मल्हार राव होलकर की छतरी 1766 एडी में महारानी अहिल्या बाई होलकर ने महान मराठा जनरल के सम्मान मे बनाई थी। यह अपनी सुंदर नक्काशी और शानदार वास्तुकला के साथ अलग है। यह इंदौर में होलकर शासकों के छतरियो के पैटर्न के समान है जो फूलों और पत्ती के पैटर्न के साथ सजावटी रूप से नक्काशीदार है। मराठा शैली छतरी शिखर गुंबद और कमान के एक सुंदर मिश्रण का प्रतिनिधित्व करती है, जिस पर कलाश को बहुत ही आकर्षक तरीके से बनाया गया है। छत्ररी की पहली मंजिल आकर्षक चित्रों से सजाए गया एक स्तंभित हॉल है।

माधवराव सिंधिया की छतरी/समाधि

महारानी सांख्यराजे सिंधिया की समाधि के ठीक सामने तालाब और उसके बाद सामने ही माधवराव सिंधिया का समाधि स्थल बना है। माधवराव सिंधिया महाराज की स्मृति में एक और छत्री का निर्माण बाद में उनकी माता के सामने ही किया गया। इस तरह माता और पुत्र की छतरियां आमने-सामने हैं। यह स्थल एक पुत्र का अपनी माता के प्रति अटूट प्रेम का प्रतीक है। इसी तर्ज पर ग्वालियर में भी कटोरा ताल रोड पर सिंधिया राजवंश की छतरियां बनी हुई हैं।

मध्यप्रदेश के प्रमुख समाधि एवं मकबरे की सूची

क्र.समाधि / मकबरेस्थान
1.तानसेन की समाधिग्वालियर
2.मोहम्मद गौस का मकबराग्वालियर
3.होशंगशाह का मकबरामाण्डू
4.तात्या टोपे की समाधिशिवपुरी
5.रानी दुर्गावती की समाधिजबलपुर (बडेलाग्राम)
6.लक्ष्मीबाई की समाधिग्वालियर
7.पेशवा बाजीराव की समाधिरावेरखेड़ी (खरगोन)
8.नवाब हसन सिद्दीकी का मकबराभोपाल
9.महारानी सांख्यराजे सिंधिया की समाधिशिवपुरी
10.रानी अवंतीबाई की समाधि डिंडोरी
11.बैजू बावरा की समाधिचंदेरी
12.अब्दुल्लाशाह चंगेज का मकबराधार
13.पीरबुधन का मकबरासावरा क्षेत्र (शिवपुरी)
14.कान्हा बाबा की समाधि हरदा
15.मुमताज महल की कब्रबुरहानपुर
16.दौलतखाँ लोदी का मकबराबुरहानपुर
17.झलकारी बाई की समाधि (रानी लक्ष्मीबाई की सहायिका)ग्वालियर
18.गिरधारी बाई की समाधि (रानी अवन्तिबाई की सहायिका)मण्डला
19.मल्हार राव होलकर की छतरीआलमपुर (भिण्ड)
20.माधवराव सिंधिया की छतरी/समाधि शिवपुरी
21.करना बाबा की समाधिहोशंगाबाद

रामगढ़ पहले मंडला जिले के अंतर्गत आता था परन्तु मंडला जिले से डिंडोरी जिला अलग होने के पश्चात रामगढ़ डिंडोरी जिले के अंतर्गत आने लगा है। रामगढ़ डिंडोरी से 23 किलोमीटर दूर अमरपुर विकास खंड के समीप है।

मध्यप्रदेश के प्रमुख समाधि एवं मकबरे पर आधारित प्रश्न

Q1. निम्न में से किसकी समाधि भोपाल जिले में स्थित है ?
(A) मुमताज महल की कब्र
(B) होशंगशाह का मकबरा
(C) नवाब हसन सिद्धकी का मकबरा ✔
(D) पीर बुधन का मकबरा

Q2. मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा मकबरा कौन सा है ?
(A) गौस मोहम्मद का मकबरा
(B) हुशंगशाह का मकबरा
(C) अब्दुल्लाशाह चंगेज का मकबरा
(D) तानसेन का मकबरा ✔

Q3. करना बाबा की समाधि कंहा स्थित है ?
(A) जबलपुर
(B) धार
(C) ग्वालियर
(D) होशंगाबाद

Q4. गिरधारी बाई की समाधि स्थल है –
(A) मण्डला ✔
(B) बुरहानपुर
(C) धार
(D) ग्वालियर

Q5. मोहम्मद गौस के मकबरे का निर्माण किस मुगल शासक ने करवाया ‌था ?
(A) शाहजहां
(B) जहांगीर
(C) बाबर
(D) अकबर ✔

Q6. रानी लक्ष्मीबाई की समाधि किस जगह पर स्थित है ?
(A) माण्डू
(B) शिवपुरी
(C) ग्वालियर ✔
(D) जबलपुर

Q7. निम्नलिखित में से किस का मकबरा/समाधि बुरहानपुर में स्थित है ?
(A) दौलतखाँ लोदी का मकबरा
(B) मुमताज महल की कब्र
(C) मोहम्मद गौस का मकबरा
(D) A और B दोनो ✔

Q8. बैजू बावरा की समाधि स्थल है ?
(A) शिवपुरी
(B) धार
(C) चंदेरी ✔
(D) बुरहानपुर

Q9. निम्नलिखित में से किसकी कब्र/समाधि शिवपुरी में नहीं है ?
(A) पीर बुधन का मकबरा
(B) महारानी सांख्यराजे सिंधिया की समाधि
(C) तात्या टोपे की समाधि
(D) झलकारी बाई की समाधि ✔

Q10. पेशवा बाजीराव की समाधि स्थल है ?
(A) खरगोन ✔
(B) धार
(C) खण्डवा
(D) बुरहानपुर

Q11. होशंगशाह का मकबरा स्थित है –
(A) मण्डला
(B) माण्डू ✔
(C) ग्वालियर
(D) भोपाल

Q12. निम्नलिखित में से कौन सी समाधि ग्वालियर जिले में स्थित नहीं है ?
(A) गिरधारी बाई की समाधि ✔
(B) झलकारी बाई की समाधि
(C) तानसेन की समाधि
(D) रानी लक्ष्मी बाई की समाधि

Q13. मोहम्मद गौस का मकबरा किस जगह स्थित है ?
(A) धार
(B) ग्वालियर ✔
(C) मांडू
(D) भोपाल

Q14. कौन से मकबरे को भारत में संगमरमर की प्रथम इमारत कहा जाता है ?
(A) दौलतखां लोदी का मकबरा
(B) गौस मोहम्मद का मकबरा
(C) नवाब हसन सिद्धकी का मकबरा
(D) हुशंगशाह का मकबरा ✔

Q15. तानसेन का मकबर किस जगह स्थित है ?
(A) शिवपुरी
(B) उज्जैन
(C) ग्वालियर ✔
(D) माण्डू

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