June 15, 2021

भारत की पंचवर्षीय योजनाएँ । Five Year Plans of India

भारत की पंचवर्षीय योजनाएँ (Five Year Plans of India)

भारत की पंचवर्षीय योजनाएँ :- पंचवर्षीय योजना निर्माण हेतु केन्द्रीय निकाय योजना आयोग है जिसका क्रियान्वयन का दायित्व केन्द्र और राज्य सरकार पर होता है। योजनाओं को अंतिम स्वीकृति / अनुमोदन राष्ट्रीय विकास परिषद् प्रदान करता है। भारत का योजना आयोग, भारत सरकार की एक संस्था थी जिसका प्रमुख कार्य पंचवर्षीय योजनायें बनाना था। 2014 में इस संस्था का नाम बदलकर नीति आयोग (राष्‍ट्रीय भारत परिवर्तन संस्‍थान) किया गया। भारत में योजना आयोग के संबंध में कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है।

15 मार्च 1950 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा पारित प्रस्ताव के द्वारा योजना आयोग की स्थापना प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में की गई थी। योजना आयोग का अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है। 17 अगस्त 2014 को योजना आयोग खत्म कर दिया गया और इसके जगह पर नीति आयोग का गठन हुआ। योजना आयोग देश के विकास से संबंधित योजनाएं बनाने का काम करता था। योजना आयोग ने 12 पंचवर्षीय योजनाएं बनाईं।

भारत की पंचवर्षीय योजनाएँ (Bharat ki panchvarshiya yojnaye) –

प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-1956)

➢ योजना आयोग ने 2000 करोड़ रुपए से पहली पंचवर्षीय योजना 1951 में शुरू की थी।

➢ यह योजना 1 अप्रैल, 1951 से 31 मार्च, 1956 तक चली।

➢ हैरॉड – डोमर मॉडल पर आधारित थी।

➢ कृषि को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की गई थी।

➢ विकास दर- लक्ष्य 2.1% , प्राप्ति 3.6%

द्वितीय पंचवर्षीय योजना (1956-1961)

➢ यह योजना 1 अप्रैल, 1956 से 31 मार्च, 1961 तक चली।

➢ दूसरी योजना पी. सी. महालनोबिस के विकास मॉडल पर आधारित थी।

➢ इसमें तीव्र औद्योगिकरण पर बल दिया गया था।

➢ इस योजना के दौरान ही भारत में राउरकेला, भिलाई तथा दुर्गापुर इस्पात कारखाना की स्थापना हुई।

➢ विकास दर- लक्ष्य 4.5% , प्राप्ति 4.2%

तृतीय पंचवर्षीय योजना (1961-1966)

➢ यह योजना 1 अप्रैल, 1961 से 31 मार्च, 1966 तक चली।

➢ तीसरी योजना जॉन सैण्डी और सुखमय चक्रवर्ती के संवृद्धि मॉडल पर आधारित थी।

➢ इसमें आत्मनिर्भरता पर बल दिया गया।

➢ विकास दर- लक्ष्य 5.6% , प्राप्ति 2.8%

➢ सर्वाधिक असफल योजना तृतीय योजना (1961-66) को माना जाता है जिसका मुख्य कारण भारत – चीन युद्ध (1962), भारत – पाक युद्ध (1965) और भयंकर सूखा था।

योजना अवकाश (1966 -1969)

➢ तृतीय पंचवर्षीय योजना के विफल होने कारण पंचवर्षीय योजना को रोक दिया गया, इसी काल को प्रथम योजना अवकाश के नाम से जाना जाता है। अगले 3 वर्षों तक वार्षिक योजना चलाई गई।

➢ वार्षिक योजनाएँ ‘योजना अवकाश’ (1966 -1969) के दौरान हरित क्रांति प्रारंभ हुआ था।

चौथी पंचवर्षीय योजना (1969-1974)

➢ यह योजना 1 अप्रैल, 1969 से 31 मार्च, 1974 तक चली।

➢ चतुर्थ योजना को आर. गॉडगिल योजना (सुरक्षा पर बल) भी कहा जाता है।

➢ इंदिरा गांधी सरकार ने 14 प्रमुख भारतीय बैंकों को राष्ट्रीयकृत किया और हरित क्रांति से कृषि में वृद्धि हुई।

➢ विकास दर- लक्ष्य 5.6% , प्राप्ति 3.3%

पांचवी पंचवर्षीय योजना (1974-1978)

➢ यह योजना 1 अप्रैल, 1974 से 31 मार्च, 1978 तक चली।

➢ यह योजना समय से पहले ही समाप्त हो गई थी। यह पंचवर्षीय योजना केवल 4 वर्ष की थी।

➢ इस योजना की रूपरेखा को डी. पी. धर ने तैयार किया था, जो एक वर्ष पहले 1978 में ही समाप्त हो गई थी।

➢ पांचवी योजना में ‘गरीबी हटाओं’ तथा ‘काम के बदले अनाज’ योजना चलाई गई।

➢ इस योजना में कृषि उत्पादन और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया गया।

➢ पांचवी योजना काल में जनता पार्टी सरकार ने अनवरत योजना (रोलिंग प्लान) चलाया।

➢ अनवरत योजना (1978-80) के जनक डॉ. गुन्नार मिर्डल एवं प्रणेता प्रो. रैगनर फ्रिश थे।

➢ विकास दर- लक्ष्य 5.6% , प्राप्ति 4.8%

योजना अवकाश द्वितीय (1979-1980)

➢ मोरारजी देसाई के नेतृत्व वाली जनता पार्टी की सरकार ने वर्ष 1978 से पंचवर्षीय योजना को पुनः बंद कर दिया तथा उसके स्थान पर वार्षिक योजना बनाई। इस काल को द्वितीय योजना अवकाश के नाम से भी जाना जाता है।

छठवीं पंचवर्षीय योजना (1980-1985)

➢ यह योजना 1 अप्रैल, 1980 से 31 मार्च, 1985 तक चली।

➢ गरीबी निवारण, अर्थव्यवस्था और आधुनिकीरण मुख्य उद्देश्य रहे।

➢ जनसंख्या को रोकने के क्रम में परिवार नियोजन भी विस्तार किया गया था।

➢ ग्रामीण विकास बैंक नाबार्ड (NABARD) की स्थापना की गई।

➢ विकास दर- लक्ष्य 5.2% , प्राप्ति 5.4%

सातवीं पंचवर्षीय योजना (1985-1990)

➢ यह योजना 1 अप्रैल, 1985 से 31 मार्च, 1990 तक चली।

➢ 7वी पंचवर्षीय की योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक उत्पादकता बढाना, अनाज के उत्पादन और रोजगार के अवसर पैदा कर क्षेत्रों में विकास की स्थापना के थे।

➢ सातवीं योजना (1985-90) की रूपरेखा को रामकृष्ण इंगर ने तैयार किया था।

➢ जवाहर रोजगार योजना (28 अप्रैल, 1989) तथा इंदिरा आवास योजना (1985-86) का प्रारंभ इसी काल (योजना) में हुआ था।

➢ विकास दर- लक्ष्य 5.0% , प्राप्ति 6.1%

योजना अवकाश तृतीय (1990-1992)

➢ वर्ष 1990 से 1992 तक भारत गहरे आर्थिक संकट से गुजर रहा था इसलिए इस अवधि के दौरान पंचवर्षीय योजनाओं को नहीं बनाया गया था। इस समय काल (1990-1992) को तृतीय योजना अवकाश के नाम से भी जाना जाता है।

आठवीं पंचवर्षीय योजना (1992-1997)

➢ यह योजना 1 अप्रैल, 1992 से 31 मार्च, 1997 तक चली।

➢ आठवीं योजना की रूपरेखा को प्रणव मुखर्जी ने तैयार किया था।

➢ प्रधानमंत्री रोजगार योजना (15 अगस्त, 1993) का प्रारंभ आठवीं योजना (1992-97) में हुआ जो सर्वाधिक सफल योजना थी।

➢ गरीबी में कमी, रोजगार सृजन को नियंत्रित करने, बुनियादी ढांचे, संस्थागत निर्माण, पर्यटन प्रबंधन, मानव संसाधन विकास, पंचायत राज आदि पर जोर दिया गया।

➢ प्राथमिक शिक्षा का सार्वजनीकरण किया गया।

➢ विकास दर- लक्ष्य 5.6% , प्राप्ति 6.6%

नौवीं पंचवर्षीय योजना (1997-2002)

➢ यह योजना 1 अप्रैल, 1997 से 31 मार्च, 2002 तक चली।

➢ नवीं योजना का लक्ष्य ‘न्यायपूर्ण वितरण एवं समानता के साथ विकास’ था।

➢ विकास दर- लक्ष्य 6.5% , प्राप्ति 5.3%

दसवीं पंचवर्षीय योजना (2002-2007)

➢ यह योजना 1 अप्रैल, 2002 से 31 मार्च, 2007 तक चली।

➢ गरीबी समाप्त करना, स्कूली शिक्षा को बेहतर बनाना तथा उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार को उपलब्ध करवाना इस योजना की मुख्य प्राथमिकता थी।

➢ विकास दर- लक्ष्य 8% , प्राप्ति 7.7%

ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना (2007-2012)

➢ यह योजना 1 अप्रैल, 2007 से 31 मार्च, 2012 तक चली।

➢ इस योजना का मुख्य उद्देश्य तीव्रतम एवं समावेशी विकास था।

➢ सबसे उच्चतम विकास दर इसी पंचवर्षीय योजना में प्राप्त की गई।

➢ विकास दर- लक्ष्य 9% , प्राप्ति 7.9%

बारहवीं पंचवर्षीय योजना (2012-2017)

➢ यह योजना 1 अप्रैल, 2012 से 31 मार्च, 2017 तक चली।

➢ इस योजना का मुख्य उद्देश्य तेज़, अधिक समावेशी और सतत विकास था।

➢ शुरू में भारत सरकार ने 8.2% की विकास दर हासिल करने का फैसला किया था, लेकिन राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) ने 27 दिसंबर 2012 को बारहवीं योजना के लिए 8% की वृद्धि दर को मंजूरी दी थी।

➢ विकास दर- लक्ष्य 8%

Note

भारत में वर्तमान मोदी सरकार ने पंचवर्षीय योजनाओं वर्ष 2017 से बनाना बंद कर दिया है। 12वीं पंचवर्षीय योजना भारत की अंतिम पंचवर्षीय योजना कही जाएगी।

सारांश के तौर यह कहा जा सकता है कि भले ही सरकार ने इन योजनाओं को बनाना बंद कर दिया हो लेकिन भारत के आर्थिक विकास में इन पंचवर्षीय योजनाओं का अतुलनीय योगदान है। इन योजनाओं के माध्यम से ही भारत ने सीखा है कि कम संसाधनों की मदद से कैसे देश को विकास के रास्ते पर लाया जा सकता है।

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