MPPSC मुख्य परीक्षा मॉडल प्रश्न पत्र सेट-1

MPPSC Mains Exam Model Question Paper

यहाँ हमने मध्यप्रदेश राज्य सेवा मुख्य परीक्षा मॉडल प्रश्न पत्र (MPPSC Mains Exam Model Question Paper) के माध्यम से परीक्षा उपयोगी सामान्य अध्ययन के महत्वपूर्ण प्रश्नों को तैयार किया है। MPPSC Mains Exam के लिए मॉडल प्रश्न पत्र के माध्यम से आप महत्वपूर्ण प्रश्नों की प्रैक्टिस कर अपने सामान्य ज्ञान का आंकलन कर सकते है। जो आपको मध्यप्रदेश राज्य सेवा मुख्य परीक्षा (MPPSC Mains Exam) एग्जॉम को क्रैक करने में मददगार एवं उपयोगी सिद्ध होंगे। यदि आप इस कंटेंट को इंग्लिश में पढ़ना चाहते है तो मेनू में जाकर लैंग्वेज सेलेक्ट कर चेंज कर सकते है। यदि आपको प्रश्नों में किसी प्रकार की त्रुटि या डाउट है तो आप कमेंट के माध्यम से पूछ सकते है। धन्यवाद !

Table of Contents

मध्यप्रदेश राज्य सेवा मुख्य परीक्षा मॉडल प्रश्न पत्र (MPPSC Mains Exam Model Question Paper)

प्रश्न– 1. भारत की लोकसभा में ‘सदन का नेता’ का क्या अभिप्राय है ?

उत्तर– संसदीय प्रणाली के अंतर्गत व्यवस्थापिका के प्रत्येक सदन में सरकार के कार्य संचालित करने के लिए सदन का एक नेता नियुक्त किया जाता है। लोकसभा में यदि प्रधानमंत्री लोकसभा का सदस्य (मेंबर) है, तो वही सदन का नेता होता है और यदि वह सदस्य नहीं होता, तो वह मंत्रिमंडल के किसी वरिष्ठ सदस्य को जो लोकसभा का सदस्य होता है लोकसभा में सदन का नेता नियुक्त कर देता है। ऐसा सदन का नेता प्रधानमंत्री के प्रति उत्तरदाई होता है। सदन का नेता स्पीकर को सदन के अधिवेशन बुलाने तथा अंत करने की तिथियां, कार्य को प्राथमिकता आदि प्रस्तावित करता है।

प्रश्न– 2. निर्णायक मत क्या होता है ?

उत्तर– निर्णायक मत निर्णय करने के लिए प्रयोग किया जाता है जब किसी व्यवस्थापिका के किसी सदन में किसी प्रस्ताव, विधेयक या प्रश्न पर मतदान के समय बराबर-बराबर मत पक्ष तथा विपक्ष में पढ़ते हैं, तब सदन का सभापति/अध्यक्ष अपना मत पक्ष या विपक्ष में दे सकता है, जिससे निर्णय हो जाता है, इसलिए इस मत को निर्णायक मत कहा जाता है।

प्रश्न– 3. सूर्य में ऊर्जा की उत्पत्ति की प्रक्रिया समझाइए ?

उत्तर– नाभिकीय संलयन के कारण सूर्य से ऊर्जा का उत्सर्जन होता है। प्रति सेकंड 7000 लाख टन हाइड्रोजन, हीलियम में परिवर्तित होती रहती है, जिससे 386 अरब मेगावाट ऊर्जा उत्सर्जित होती है। इस प्रक्रिया में गामा किरणों के रूप में 50 लाख टन ऊर्जा भी उत्सर्जित होती है। विभिन्न सतहों में तापमान में अंतर के कारण यह प्रक्रिया ऊर्जा के उत्सर्जन और अवशोषण के सतत चक्र में परिवर्तित हो जाती है। अंतिम स्थिति तक पहुंचते-पहुंचते यह उस प्रकश पुंज में बदल जाती है, जिसे हम पृथ्वीवासी ‘धूप’ के नाम से पुकारते हैं।

प्रश्न– 4. चौथी दुनिया के देश किसे कहा जाता है ?

उत्तर– विश्व के अत्यल्प (Least Developed Countries) को चौथी दुनिया के देश कहा जाता है। अफ्रीका एवं एशिया के लगभग 70 देश इस श्रेणी में आते हैं जहाँ औद्योगिक उत्पादन प्रारंभ ही नहीं हुआ है अथवा बहुत ही निम्न स्तर का है। साक्षरता दर बहुत कम है। आधारभूत प्राथमिक आवश्यकताओं की पूर्ति भी समुचित रूप से नहीं होती। ये देश विदेशी सहायता एवं ऋण पर सदैव निर्भर रहते हैं। गौरतलब है कि तीसरी दुनिया के देश वे कहलाते हैं, जो विकासशील हैं, अर्थात जहाँ कुछ विकास हो चुका है और विकास की प्रक्रिया निरंतर जारी है।

प्रश्न– 5. नासा क्या है ? इसकी स्थापना क्यों और किस प्रकार हुई ?

उत्तर– नेशनल एयरोनॉटिक्स एण्ड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी है, जो अंतरिक्ष परियोजनाओं को तैयार एवं उनका संचालन करती है। नासा की स्थापना तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति आइजनहॉवर ने 1958 में की थी।

4 अक्टूबर, 1957 को सोवियत संघ ने प्रथम उपग्रह का प्रक्षेपण किया था। इसी प्रक्षेपण ने अमेरिका का ध्यान अंतरिक्ष कार्यक्रम की ओर आकर्षित किया। 1969 में मानव को चाँद पर उतारने और सकुशल वापस धरती पर लाने में नासा सफल रहा। यह एक ऐतिहासिक सफलता थी। इस समय नासा अनेक परियोजनाओं परकाम कर रहा है, जिनमें प्रमुख हैं- चाँद पर स्थाई ठिकाना बनाना और मंगल पर मानव को उतारना।

प्रश्न– 6. इलबर्ट बिल क्या था और यह कब पारित हुआ ?

उत्तर– इलबर्ट बिल द्वारा यूरोपियनों से संबंधित भारतीय कानून में परिवर्तन किया गया। 1873 के क्रिमिनल प्रोसीजर कोड के अनुसार प्रेसीडेंसी टाउन के अतिरिक्त कोई भी भारतीय जज किसी भी यूरोपीय या ब्रिटिश मूल के व्यक्ति का मुकदमा नहीं सुन सकता था, लेकिन 1880 ई. तक अनेक भारतीय जज के महत्वपूर्ण ओहदे तक पहुंच चुके थे और उनकी माँग थी कि उन्हें भी यूरोपीय जजों के बराबर अधिकार मिलें। तब सरकार ने इस न्यायिक असमानता को दूर करने के लिए भारत सरकार के कानून सदस्य सर कोर्टनी इलबर्ट को नियुक्त किया।

सर कोर्टनी इलबर्ट ने 1882 ई. में यूरोपीय जजों और भारतीय मूल के जजों को समानता देने के लिए एक बिल पारित कराया जिसे इलबर्ट बिल कहते हैं। लॉर्ड रिपन की एग्जीक्यूटिव काउंसिल और प्रान्तीय परिषदों सहित इम्पीरियल लेजिस्लेटिव काउन्सिल ने इलबर्ट बिल को 1882 में स्वीकार कर लिया। इस बिल का यूरोपीय समुदाय द्वारा जमकर विरोध किया गया। जिसके कारण इलबर्ट बिल में कई परिवर्तन करने पड़े तथा यह बिल अपना उद्देश्य प्राप्त न कर सका। यूरोपियनों द्वारा इलबर्ट बिल के विरोध के कारण भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को बल मिला।

प्रश्न– 7. ग्रीन हाउस गैसें क्या हैं ?

उत्तर– कार्बन डाइऑक्साइड, मिथेन, वाष्प, हैलोजनित गैसें तथा सी.एफ.सी आदि ग्रीन हाउस गैसें हैं। ये गैसें सूर्य की किरणों को पृथ्वी तक पहुंचने के लिए पारदर्शिता का कार्य करती है, परंतु पृथ्वी से निकलने वाले दीर्घ तरंग विकिरण को बाहर जाने से रोकती है जिससे धरातल तथा निचला वायुमंडल सतत गर्म रहता है।

प्रश्न– 8. प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन क्यों आयोजित किया जाता है ?

उत्तर– राष्ट्रपति महात्मा गांधी के 9 जनवरी को दक्षिण अफ्रीका से भारत पहुंचने की स्मृति में भारत सरकार प्रतिवर्ष 7- 9 जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का आयोजन करती है। जिसमें विदेशों में रह रहे अनिवासी भारतीयों तथा भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों को उल्लेखलीय उपलब्धियाँ हासिल करने के लिए सम्मानित किया जाता है तथा उन्हें भारत के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित किया जाता है। पहला प्रवासी भारतीय दिवस 2003 आयोजित किया गया था।

प्रश्न– 9. विशेष आहरण अधिकार (एस. डी. आर.) पर टिप्पणी लिखिए ?

उत्तर– विशेष आहरण अधिकार (एस. डी. आर.) एक अति महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय आस्ति है जिसका सृजन सन 1969 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा सदस्य देशों के विद्धमान अधिकृत प्रारक्षित निधियों के पूरक के रूप में किया गया था। यह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष तथा कुछ अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के लेखा की इकाई है। विशेष आहरण अधिकारों का आवंटन सदस्य देश के कोटा के अनुपात में किया जाता है। एक विशेष आहरण अधिकार का मूल्य 0.888671 ग्राम शुद्ध स्वर्ण के समतुल्य होता है।

प्रश्न– 10. मुक्त व्यापार क्षेत्र पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ?

उत्तर– दो या दो से अधिक देशों की पारस्परिक सहमति से उत्सर्जित ऐसा भौगोलिक/राजनीतिक सीमाओं से युक्त क्षेत्र जिसके भीतर वस्तुओं के आयात-निर्यात पर किसी भी प्रकार का कोई प्रतिबंध या रोध (प्रशुल्कीय या गैर प्रशुल्कीय) न हो मुक्त व्यापार क्षेत्र कहलाता है।

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