भारत के प्रमुख किलों का विश्लेषण

forts of India

किला या दुर्ग ऐसे स्थान को कहा जाता है, जो मिट्टी, ईंट एवं पत्थर आदि की चौड़ी दीवारों से घिरा रहता है। किले का इस्तेमाल राजा, सरदार एवं सेना के सिपाही आदि निवास के रूप में करते थे। वर्तमान में इसका प्रयोग छावनी, संग्रहालयो एवं ऐतिहासिक पर्यटक स्थलों के रूप में किया जा रहा है।

महल राजा या राज्य के सर्वोच्च सत्ताधिकारी व्यक्ति के भव्य गृह को महल या प्रासाद कहते हैं। भारत की प्राचीन वास्तुविद्या के आधार पर महल या प्रासाद लम्बा, चौड़ा, ऊँचा कई भूमियों पर बना पक्का घर होता है। जिसमें अनेक शृंग, श्रृंखला, अण्डकादि आदि होते हैं।

किलों का प्रथम लिखित साक्ष्य ऋग्वेद में मिलता है। ऋग्वेद में दुर्गों का उल्लेख किया गया है। वैदिक काल में किलों को ‘पुर’ कहा जाता था। मनु ने दुर्गों को निम्नलिखित छह प्रकारों में विभाजित किया है।

  1. जल दुर्ग जिसके चारों ओर जल हो।
  2. धनु दुर्ग जिसके चारों ओर निर्जल प्रदेश हो।
  3. मही दुर्ग जिसके चारों ओर टेढ़ी – मेढी जमीन हो।
  4. वृक्ष दुर्ग जो चारों ओर से घने वृक्षों से घिरा हो।
  5. नर दुर्ग जिसके चारों ओर सेना हो।
  6. गिरि दुर्ग जो चारों ओर पहाड़ों से घिरा हो।

भारत के प्रमुख किलों का विश्लेषण निम्नलिखित है।

विरासत की गहरी जड़ों से . . . प्रमुख किले –

▦ गैगरॉन का किला
झालावाड़ (राजस्थान) से 10 कि.मी की दूरी पर स्थित गैगरॉन के किले का निर्माण बारहवीं शताब्दी में झाला राजपूत शासकों ने किया था। यह काली सिंघ तथा अहू नदी के तटवर्ती क्षेत्र में निर्मित है। 22 जून, 2013 को यूनेस्को ने इस किले को विश्व विरासत स्थल सूची में शामिल किया है।

▦ जैसलमेर का किला
जैसलमेर किले का निर्माण 1156 ई. में भाटी राजपूत शासक राव जैसल ने करवाया था। त्रिकूट पहाड़ी पर स्थित यह किला गोल्डेन फोर्ट के नाम से जाना जाता है। 22 जून, 2013 को यूनेस्को ने इस किले को विश्व विरासत स्थल सूची में स्थान दिया है।

▦ चित्तौड़गढ़ का किला
यह देश का सबसे बड़ा और मजबूत किला माना जाता है। यह करीब 60 कि.मी क्षेत्र में फैला है। मान्यता है कि सातवीं सदी से भी पहले इसका निर्माण चित्रांग मौर्य ने करवाया। बाद में 734 ई. में जब बप्पा रावल ने सिसोदिया वंश की स्थापना की, तो उन्होंने इसका पुनर्रूद्धार करवाया। इसके बाद इसमें कीर्ति स्तम्भ और कई निर्माण होते रहे। अलाउद्दीन खिलजी ने 1303 ई. में यहाँ आक्रमण किया। 22 जून, 2013 को यूनेस्को ने चित्तौड़गढ़ किले को विश्व विरासत स्थल सूची में स्थान दिया है।

▦ रणथम्भौर का किला
यह सवाई माधोपुर (राजस्थान) में थम्भौर पहाड़ी पर स्थित है। इस किले की मजबूत दीवारें इतिहास प्रसिद्ध हैं। इसकी दीवारें 28 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली हैं। मान्यता है कि चौहान राजा सपल दक्ष ने इसका निर्माण शुरू करवाया। बाद में राजा हमीर ने इसे पूरा करवाया। अलाउद्दीन खिलजी ने वर्ष 1301 ई. में यहाँ कब्जा कर लिया। बाद में 17वीं सदी में यह जयपुर का हिस्सा बना। 22 जून, 2013 को यूनेस्को ने इस किले को विश्व विरासत स्थल सूची में शामिल किया है।

▦ माण्डु का किला
माण्डु का किला को त्रम सुल्तान मोहम्मद तुगलक ने 1844 ई. में माण्डु के किले का पुनर्निर्माण करवाया था। माण्डु का किला परमारकालीन स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है। माण्डु के किले का क्षेत्रफल 20 वर्ग मील है। इस किले के भीतर हिण्डला महल, चम्पा बाओली, दिलबार खान का मकबरा इत्यादि मौजूद हैं।

▦ तुगलकाबाद का किला
इस किले का निर्माण ग्यासुद्दीन तुगलक ने तुगलकाबाद में 1321-25 ई. के बीच करवाया था। इस किले का निर्माण मंगोल आक्रमण से बचने के लिए करवाया गया था।

▦ गोलकुण्डा का किला
आन्ध्र प्रदेश के हैदराबाद में स्थित इस किले का निर्माण कुतुबशाही वंश के शासकों ने 12-16वीं शताब्दी के बीच करवाया था। कोहिनूर हीरा यहीं पाया गया था। दक्षिण भारत का यह महत्वपूर्ण किला माना जाता था।

▦ दौलताबाद का किला
महाराष्ट्र के औरंगाबाद में स्थित इस किले का नामकरण 1327 ई. में मुहम्मद बिन तुगलक ने किया था। इसका प्राचीन नाम देवगिरि था तथा यहाँ यादव वंश का शासन था। मध्य काल में यह किला सर्वाधिक शाक्तिशाली किलों में गिना जाता था।

▦ कुम्भलगढ़ का किला
राजस्थान के राजसमन्द में स्थित इस किले का निर्माण महाराणा कुम्भा ने 1443 ई. में करवाया था। सम्राट अशोक के दूसरे पुत्र सम्प्रति के बनाए दुर्ग के अवशेषों पर इस किले का निर्माण हुआ है। दुर्ग का निर्माण पूरा होने पर महाराणा कुम्भा ने सिक्के ढलवाए जिन पर किला और उसका नाम अंकित था। यह समुद्र तल से 1087 मी ऊँचाई पर स्थित है तथा 30 किमी क्षेत्र में फैला है। 22 जून, 2018 को यूनेस्को ने विश्व विरासत स्थल सूची में इस किले को स्थान दिया है।

▦ सेण्ट एन्जिलो फोर्ट
यह किला केरल के कुन्नूर में स्थित है। इस किले का निर्माण 1805 ई. में प्रथम पुर्तगाली बायसराय डॉन फ्रांसिस्को डी. अलमर्डा ने करवाया था।

▦ ग्वालियर का किला
ग्वालियर के किले का निर्माण 1525 ई. में राजा सूरजसेन ने करवाया था। है दुर्मेघता के कारण इसे किलों को रत्न या जिब्राल्टर ऑफ इण्डिया कहते हैं। में 1540 ई. में सूरी वंश के शासक इस्लामशाह ने अपनी राजधानी दिल्ली से ग्वालियर स्थानान्तरित की थी।

▦ श्रीरंगपट्टनम का किला
इस किले का निर्माण सामन्त कैम्पे गौड़ा ने मैसूर (कर्नाटक) में 1537 ई. में करवाया था। यह किला कावेरी नदी के द्वीप पर बनाया गया है। टीपू सुल्तान एवं हिन्दू – मुस्लिम संस्कृति के कारण यह किला प्रसिद्ध है।

▦ लाल किला (आगरा)
आगरे के किले का ऐतिहासिक विवरण 1080 ई. से मिलता है। तत्कालीन समय में यह ईंटों से बना था तथा चौहान राजपूतों के आधिपत्य में था। ईंटों से निर्मित यह किला 1558 ई. तक बादलगढ़ के नाम से जाना जाता था। पानीपत के युद्ध के पश्चात् यह किला मुगलों के आधिपत्य में आ गया। मुगल बादशाह अकबर ने 1565 ई. में लाल बलुआ पत्थर से वर्तमान किले का निर्माण करवाया। वर्ष 1983 में यूनेस्को ने इस किले को विश्व धरोहर स्थल सूची में शामिल किया। आगरा के किले को वर्ष 2004 में आगाखां वास्तु पुरस्कार दिया गया तथा भारतीय डाक विभाग ने 28 नवम्बर, 2004 को इस पर डाक टिकट जारी किया था।

▦ पुराना किला (दिल्ली)
1805 ई. में ब्रिटिश सेना ने लॉर्ड लेक के नेतृत्व में इस किले पर आक्रमण किया तथा इस पर आधिपत्य कायम किया। इस किले के भीतर किशोरी महल, महल खास तथा कोठी खास स्थित है। इसके द्वार पर वृहद हाथियों का चित्र बना है।

पुराना किला नई दिल्ली में यमुना नदी के किनारे स्थित है। यह हुमायूँ द्वारा निर्मित ‘दीन पनाह’ नगर का आन्तरिक किला है। इसका निर्माण 1538 ई. से 1545 ई. के मध्य शेरशाह सूरी ने करवाया था। प्राचीन विवरणों के अनुसार यह किला उसी स्थान पर स्थित है जहाँ पाण्डवों की विशाल राजधानी इन्द्रप्रस्थ स्थित थी। वर्ष 1955 में इस स्थल की खुदाई से महाभारतकालीन अवशेष भी प्राप्त हुए थे। पुराने किले के भीतर शेरशाह सूरी द्वारा निर्मित किला-ए-कुन्हा मस्जिद है जो दो तलीय अष्टभुजी संरचना है।

पुराने किले की सम्पूर्ण चाहरदीवारी की परिधि 2.4 कि.मी है। इसके तीन प्रमुख दरवाजे हैं। उत्तर की ओर खुलने वाले दरवाजे को ‘तलाकी दरवाजा’ कहा जाता था जो प्रतिबन्धित मार्ग था।

▦ बीकानेर का किला
इस किले का निर्माण महाराजा राय सिंह ने 1558 ई. में करवाया था। किले की 143 स्थापत्य कला मथुरा कला शैली से प्रभावित है। इस किले में हस्तलिखित पुस्तकों का पुस्तकालय स्थित है। यह किला राजस्थान के बीकानेर में स्थित है। इसे जूनागढ़ का किला भी कहते हैं।

▦ आमेर का किला
जयपुर (राजस्थान) से करीब 10 कि.मी दूर उत्तर में स्थित यह किला 1592 ई. में राजा मानसिंह ने बनवाया था। बाद में मिर्जा राजा जयसिंह ने इसका पुनर्रूद्धार करवाया। यह 4 वर्ग किमी में फैला है। यह किला अपनी स्थापत्य कला के लिए विश्व प्रसिद्ध है। 22 जून, 2013 को यूनेस्को ने इस किले को विश्व विरासत स्थल सूची में सम्मिलित किया है।

▦ लाल किला (दिल्ली)
मुगल बादशाह शाहजहाँ ने 1639 ई. में लाल किले का निर्माण पुरानी दिल्ली में करवाया था। 12 मई, 1639 को लाल किले की आधारशिला इज्जत खाँ की देख-रेख में रखी गई थी। दो प्रसिद्ध कारीगरों उस्ताद हमीद एवं उस्ताद अहमद ने लाल किले के निर्माण में योगदान दिया था। लाल बलुआ पत्थर से बना होने के कारण, किले को लाल किला कहा गया। शाहजहाँ के काल में इसे उर्द-ए-मुअल्ला कहा जाता था। वर्ष 2007 में इस किले को यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल सूची में शामिल किया है।

▦ लौहगढ़ का किला
भरतपुर में स्थित इस किले का निर्माण जाट राजा सूरजमल ने 18 वीं सदी में करवाया था। दुर्भेद्यता के कारण इसका नाम लोहगढ़ रखा गया।

▦ फोर्ट सेण्ट जॉर्ज
इस किले का निर्माण मद्रास में औपनिवेशिक काल में 1644 ई. में करवाया गया था। इस किले का निर्माण औपनिवेशिक व्यापार गतिविधियों के लिए किया गया था। इस किले को फ्रांसिस-डे ने बनवाया था।

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