June 15, 2021

अंकगणित (Arithmetic)

यहाँ पर हमने अंकगणित (Arithmetic) से संबंधित संख्या पद्धतियों की परिभाषायें दी है। किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सिलेक्शन के लिए गणित (Mathmatics) एक अहम् रोल प्ले करता है। इसलिए आपको यदि गणित विषय में बेसिक जानकारी, फॉर्मुलास, परिभाषायें आदि सब आता है तो आप मैथ्स को अच्छी तरह और जल्दी सॉल्व कर सकते है। इसी क्रम में हमने अंकगणित (Arithmetic) से संबंधित संख्या पद्धतियों की परिभाषायें दी है। इन परिभाषाओं को आवश्यक रूप से पढ़ लेना चाहिए। यदि पोस्ट अच्छी लगे तो दोस्तों और सोशल मीडिया पर शेयर जरूर करे। धन्यवाद दोस्तों !

संख्या पद्धतियों की परिभाषायें

1. प्राकृतिक संख्यायें [Natural Numbers]

गिनती की संख्यायें प्राकृतिक संख्यायें हैं। जैसे- 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8 इत्यादि।

2. सम संख्यायें [Even Numbers]

जो प्राकृतिक संख्यायें 2 से विभाज्य हैं। उन्हें सम संख्या कहते हैं, जैसे- 2, 4, 6, 8, 10, 12 इत्यादि।

3. विषम संख्यायें [Odd Number]

जो प्राकृतिक संख्यायें 2 से विभाज्य नहीं होती उन्हें विषम संख्यायें (Odd Numbers) कहते हैं जैसे -1, 3, 5, 7, 9, 11, 13 इत्यादि। 

4. पूर्ण संख्यायें [Whole Numbers] – 

प्राकृतिक संख्याओं में शून्य को मिला देने पर पूर्ण संख्यायें बनती हैं। जैसे- 0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8 इत्यादि।

5. अभाज्य संख्यायें या रूढ़ संख्यायें [Prime Numbers]

वह प्राकृतिक संख्यायें जो एक या अपने को छोड़कर किसी अन्य संख्या से विभाजित नहीं होती उन्हें अभाज्य या रूढ़ संख्यायें कहते हैं। जैसे -2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19, 29 इत्यादि।

6. यौगिक संख्यायें [Composite Numbers]

ऐसी प्राकृतिक संख्यायें जो एक या अपने को छोड़कर अन्य किसी भी दूसरी संख्या से विभाज्य हो, यौगिक संख्यायें कहते हैं, जैसे- 4, 6, 8, 9, 10, 12, 14, इत्यादि। 

7. पूर्णाक संख्यायें [Integers]

-1, -2, -3, 4, 3, 2, 1 ……. इत्यादि पूर्णांक संख्यायें होती हैं, 1, 2, 3, 4, आदि को धनात्मक पूर्णाक [Positive Numbers] तथा -1, -2, -3 आदि को ऋणात्मक पूर्णांक [Negetive Numbers] कहते हैं। 0 (शून्य) को धनात्मक या ऋणात्मक माना जा सकता है।

8. परिमेय संख्यायें [Rational Numbers]

ऐसी लघुत्तम भिन्न जिसके अंश तथा हर पूर्णांक संख्यायें रखते हों लेकिन हर 0 (शून्य) न हो, परिमेय संख्यायें कहलाती हैं, जैसे- 1/2, 1/4, 5/8, 3/8 इत्यादि।

9. अपरिमेय संख्यायें [Irrational Numbers]

जिस प्राकृतिक संख्या का वर्गमूल निकालने पर पूर्ण संख्या प्राप्त नहीं होती उसे अपरिमेय संख्या कहते हैं। जैसे- √2, √3, √5, 1/√3 इत्यादि।

10. प्राकृतिक संख्याओं के योग नियम

Arithmetic 1

11. सम संख्याओं का योग नियम

Arithmetic 2

12. विषम संख्याओं का योग नियम

Arithmetic 3

13. सम संख्या और विषम संख्या खेल के रूप में

किसी भी व्यक्ति को सम और विषम संख्या हाथ में रखने को कहें दाहिने में 3 से और बायें में 2 से गुणा कर दोनों को जोड़ने को कहें। यदि जोड़ सम है तो दाहिने हाथ की संख्या सम होगी। यदि जोड़ विषम है तो दाहिने हाथ की संख्या विषम होगी।

जैसे – दाहिने हाथ में 8 है तो 8 X 3 = 24

बायें हाथ में 7 है तो 7 X 2 = 14

योग = 38

अतः दाहिने हाथ में सम और बायें हाथ में विषय संख्या है।

14. किसी भी पहाड़ा का योग

45 x पहाड़ा का पहला अक + पहाड़ा का पहला अक x 10

जैसे – 8 के पहाड़ा का योग = 45 X 8 + 8 X 10 = 440 Ans.

4 के पहाड़ा का योग 45 X 4 + 4 X 10 = 220 Ans.

13 के पहाड़ा का योग = 45 X 13 + 13 X 10 = 715 Ans.

15. वर्ग नियम

वर्ग निकालने के लिए इकाई स्थान के लिए 1, दहाई स्थान के लिए 2, सैकड़ा के लिए 3, हजार स्थान के लिए 4 आदि को जिस क्रम में सजाना है उसके उल्टे क्रम में सजाते हैं, और जो परिणाम आता है वही वर्ग कहलाता है।

जैसे : (√11), (√111), (√1111) आदि के लिए (√11) = 121, (√111) = 12321 (√1111) = 1234321 इत्यादि।

16. दो संख्याओं का गुणा

(i) सूत्रानुसार- इकाई अंक में गुणा करने पर जो गुणनफल आता है उसे इकाई अंक के नीचे लिख देते हैं।

(ii) दहाई से दहाई अंक में गुणा करने से पहले किसी एक दहाई अंक में एक जोड़ देने पर जो संख्या आती है उसको दूसरे दहाई अंक से गुणा करने पर जो गुणनफल आता है वह दहाई अंक के नीचे लिखे वही उत्तर हैं। जैसे –

Arithmetic 4

17. पहाड़ा निकालने का सूत्र

हमें यदि ऐसी संख्या का पहाड़ा लिखना हो जिसके अन्त में (9) हो, जैसे -19, 29, 39, 49 आदि तो सर्वप्रथम संख्या के इकाई अंक 9 से एक – एक अंक (0) शून्य तक घटाते हुए लिखते हैं और हम जिस अंक का पहाड़ा लिखना चाहते हैं उसके अगले अंक की दहाई संख्या जो भी हो उसका पहाड़ा पढ़ने पर (उस संख्या को छोड़कर) दूसरी बार से जो योग आता है उसमें क्रमशः 1, 2, 3 ………9 तक जोड़ते चले जाते हैं तो पहाड़ा पूरा हो जाता है। जैसे –

19

38 +1

57 +2

76 +3

95 +4 इत्यादि।

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